केवल नमः शिवाय क्यों? 5 मुख्य कारण एवं महिमा | Shiv Guru Charcha

आज के समय में केवल नमः शिवाय क्यों के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।

केवल नमः शिवाय क्यों

साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।

जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।

एक मित्र ने मैसेंजर पर पूछा

ॐ नमः शिवाय क्यों नहीं?
केवल नमः शिवाय क्यों?

मैंने कोशीश की
गुरू दया से…

इस सवाल के कई जवाब हैं।

मन्त्र विज्ञान में जायेंगे तो बहुत लंबा हो जायेगा।

संक्षेप में मैं ये जानता हूँ कि श्वास-प्रश्वास पर किए जाने वाले किसी मन्त्र में ॐ नहीं लगता है।

सबसे बड़ी बात, परिणाम जिससे मिलता है वो करेंगे।
लोगवा जो कहता है, करके देख लिया है।
हज़ारों सालों से ॐ चल रहा है, परिणाम?

सारे मन्त्र कीलित (coded) हैं।
उनका उत्कीलन (decoding) करने के बाद ही वो परिणाम देता है।

आप श्वास लेने समय नमः और छोड़ते समय शिवाय करके देखिए।
आराम आराम से, गिनने की कोई ज़रूरत नहीं।

वैसे भी ॐ तो सूक्ष्मातिसूक्ष्म स्पंदन है, जो साध्य है, साधन नहीं।
शरीर या मन इसका उच्चारण नहीं कर सकता और जीवात्मा तो स्वयं ॐ कार ही है।

ये एक क्लिष्ट विषय है, इस पर मिलकर ही बात हो सकती है।

वैसे भी हम शिष्यों को ज्ञान देने का नहीं, ज्ञान के परम स्रोत से जोड़ने का और जुड़ने का आदेश मिला है।

उद्देश्य मन्त्र को सिद्ध करना नहीं है।

उद्देश्य है अपने गुरु को प्रणाम करने की कोशिश करना।

और यह मार्गदर्शन है कि “चाहें तो” नमः शिवाय का प्रयोग कर सकते हैं।

मेरे विचार से, अल्लाह सलाम या god salute भी चल सकता है। आप अपना मन्त्र भी बना सकते हैं।

शब्द से अधिक उद्देश्य महत्त्वपूर्ण है।

प्रणाम में भाव का प्रवेश गुरू दया से ही संभव है। गुरू को भाव जनित प्रणाम ही स्वीकार्य होता है।

गुरू से जुड़िये, स्वतः सब जान जाइयेगा।

इसके लिये, शिव-गुरु की दया से, मानव-जाति को, शिव-गुरु की दया से 3 सूत्र सहायक हैं।

1. दया मांगना:

“हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये” (मन ही मन)

2. चर्चा करना:

दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, “शिव मेरे गुरु हैं, आपके भी हो सकते हैं”

3. नमन करना:

अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करने की कोशिश करना। चाहें तो नमः शिवाय का प्रयोग कर सकते हैं। (मन ही मन, सांस लेते समय नमः तथा छोड़ते समय शिवाय)

मुख्य बिंदु (Key Takeaways – केवल नमः शिवाय क्यों)

  • शाश्वत सत्य: केवल नमः शिवाय क्यों का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
  • शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
  • 3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।

विशेष आध्यात्मिक संदेशों के लिए शिव शिष्य हरींद्रानंद फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। अधिक लेखों के लिए शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) पर नियमित पधारें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top