आज के समय में गुरु कौन हो सकते हैं के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।

साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।
जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।
गुरु वही हो सकते हैं,
जिनमें गुरूत्त्व हो।
ईश्वर से अधिक गुरूत्त्व किसमें हो सकता है?
गुरु का एक अर्थ भारी भी होता है।
जो सब पर भारी है,
उसे ही तो ईश्वर कहते हैं।
जो गुर (रहस्य) सिखला दे,
उसे ही गुरु कहते हैं।
जगत के सारे रहस्यों के ज्ञाता तो केवल ईश्वर ही हैं।
जिसके पास ज्ञान है,
वही गुरु हो सकते हैं।
तीनों कालों का ज्ञान रखनेवाले,
सर्वज्ञ तो ईश्वर ही हैं।
तो ईश्वर जो कि अंर्तयामी हैं,
सूक्ष्मातिसूक्ष्म परम चैतन्यात्मा हैं,
अंतर्ज्ञान और बाह्यज्ञान दोनों के ज्ञाता और दाता हैं,
निश्चय ही गुरु भी हैं।
वैसे भी गुरु को भगवान जैसा कहा गया है।
जो भगवान जैसा है,
अगर वह गुरु है,
तो स्वयं भगवान गुरु क्यों नहीं?
एक ही व्यक्ति अलग अलग भूमिकाओं में पिता, पुत्र, मामा, चाचा, शिक्षक इत्यादि हो सकते हैं।
तो वह घट घट वासी, अविनाशी, विश्वरूप, परमात्मा, जो अनंत रूपों में हैं,
उनका एक रूप गुरु भी है।
।।या शक्ति, शिवस्य शक्ति।।
शक्तियां जो भी हैं, ईश्वर की शक्तियां हैं।
परमात्मा की इच्छाएं ही उनकी शक्तियां हैं।
परमात्मा की इच्छाओं को आदेश मानकर, उसपर चलने की कोशीश करना ही शिव-शिष्यता है।
परमात्मेच्छा को समझने की पात्रता को बढ़ाया जा सकता है।
इसके लिये अपनी चेतना को सूक्ष्मातिसूक्ष्म परम चैतन्यात्मा से जोड़ने की जरुरत है।
ठीक उसी तरह, जिस तरह हम अपने स्मार्टफोन को इंटरनेट से कनेक्ट करते हैं।
इसके लिये हमें 1.डायल करना, 2.बैलेंस रिचार्ज करना और 3.बैटरी चार्ज करना पड़ता है।
उसी तरह ईश्वर के गुरू स्वरुप से जुड़ने के लिये भी, शिव-गुरु की दया से, मानव-जाति को, शिव-गुरु की दया से 3 सूत्र सहायक हैं।
1. दया मांगना-
“हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये” (मन ही मन)
2. चर्चा करना-
दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, “शिव मेरे गुरु हैं, आपके भी हो सकते हैं”
3. नमन करना-
अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करने की कोशिश करना। चाहें तो नमः शिवाय का प्रयोग कर सकते हैं। (मन ही मन, सांस लेते समय नमः तथा छोड़ते समय शिवाय)
करके देखा जाए। मुझे बहुत ही सुन्दर परिणाम मिले हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways – गुरु कौन हो सकते हैं)
- शाश्वत सत्य: गुरु कौन हो सकते हैं का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
- शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
- 3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।
विशेष आध्यात्मिक संदेशों के लिए शिव शिष्य हरींद्रानंद फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। अधिक लेखों के लिए शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) पर नियमित पधारें।
