आज के समय में ब्रह्मा विष्णु महेश के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।

साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।
जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।
देव या देवी का क्या अर्थ है?
सूक्ष्म सत्ता को देव तथा सूक्ष्म शक्ति को देवी कहते हैं।
ईश्वर को त्रिगुण ब्रह्म भी कहा गया है, क्योंकि वो सृजन, पालन और संहार, तीनो कार्य कर सकते हैं।
इन्ही 3 गुणों को क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा इन 3 तरह की सूक्ष्म शक्तियों को सरस्वती, लक्ष्मी तथा काली कहा गया है।
इन सभी को धारण करने वाले को परब्रह्म परमेश्वर या शिव कहा गया है।
तस्वीरों को देखकर भ्रम होता है कि, इन देवों या देवियों का ऐसा स्वरुप है, जबकि तस्वीरें इनके गुणों को प्रदर्शित करने के लिए बनायी गयी थीं, न कि स्वरुप को।
ईश्वर का साकार रूप यह चराचर ही है, जिसमे हम और आप भी आते हैं।
इन बातों को अनुभव ज्ञान से ही समझ जा सकता है, जो केवल परमात्मा की दया से ही संभव है।
परमात्मा या शिव का गुरु भाव ही उनका दया भाव है, जो प्रसारित तो सबके लिए होता आ रहा है, लेकिन उसको ग्रहण वही कर सकता है, जो शिष्य भाव में है।
शिव को “अपना” गुरु बनाने के लिए, शिव-गुरु की दया से, शिव-गुरु की दया से 3 सूत्र दिए गए हैं…
मुख्य बिंदु (Key Takeaways – ब्रह्मा विष्णु महेश)
- शाश्वत सत्य: ब्रह्मा विष्णु महेश का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
- शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
- 3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।
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