ध्यान क्या है? 3 मुख्य विधियाँ एवं सही अर्थ | Shiv Guru Charcha

आज के समय में ध्यान क्या है के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।

ध्यान क्या है

साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।

जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।

ध्यान क्या है?

जब आप कहते हैं, ध्यान से सुनो, तो आपका मतलब ये नहीं होता कि, आसन लगाकर बैठ जाओ और आँख बंद कर लो। उल्टे ध्यान से सुनने का मतलब है, आँखों से आँखें मिलाकर बात सुनो।

मैं आँख बंद करके बैठा हूँ और मेरा ध्यान मेरे पुत्र पर या पत्नी पर या संसार में और कहीं भटकता रहता है, तो क्या इसे ध्यान कहेंगे?

वास्तव में ध्यान का सम्बन्ध चर्चा से है। हम जिसकी चर्चा करते हैं, हमारा ध्यान तुरत उसपर जाता है।
उदहारण के लिए अगर हम सचिन तेंदुलकर की चर्चा करेंगे तो हमारा ध्यान तुरत सचिन तेंदुलकर पर जायेगा।
अगर मैं दिनभर राजनीति की चर्चा करूँगा, तो अकेले में भी मेरा ध्यान उन्ही बातों पर जायेगा, जिनकी चर्चा मैं बार बार करता हूँ।

इतना ही नहीं जिस विचार की चर्चा हम बार बार करते हैं उस विचार की आवृत्ति हमारे मन में बार बार होती है और वह विचार घनीभूत होकर भाव में बदल जाता है, जो अधिक ठोस होता है और जल्दी नहीं टूटता।

निष्कर्ष ये कि हम जिस चीज पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, हमें उस चीज या बात या विचार की चर्चा बार बार करनी पड़ेगी, तभी जब हम आँख बंद करके भी बैठेंगे, तो ध्यान उसपर जायेगा, जिसपर हम ले जाना चाहते हैं।

अब प्रश्न यह है कि कौन है, जो हमारे ध्यान के योग्य (आराध्य) है?

किसके ध्यान से हमारी चेतना का परिमार्जन और विकास होगा?

किससे जुड़कर हमारी हर जिज्ञासा का समाधान हो सकता है?

कौन है जो हमारी आपकी चेतना का गुरु हो सकता है?

तो जो स्रोत है हमारी आपकी चेतना का, जो परम चेतना है, वही हमारा गुरु है।
उससे जुड़कर ही हम जान सकते हैं, मेरे लिए क्या सही है।
उस परम चेतना से “मनसा वाचा कर्मणा” जुड़ना पड़ेगा।

कैसे?

क्या कोई सूत्र हैं?

इसके लिये, शिव-गुरु की दया से, मानव-जाति को, शिव-गुरु की दया से 3 सूत्र सहायक हैं।
1.दया माँगना:

हे शिव, आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये।

2.चर्चा करना:

दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, शिव मेरे गुरु हैं, आपके भी हो सकते हैं।

3.नमन करना:

अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करना। चाहें तो “नमः शिवाय” का प्रयोग कर सकते हैं।
(सांस लेते समय नमः, छोड़ते समय शिवाय, मन ही मन)

मुख्य बिंदु (Key Takeaways – ध्यान क्या है)

  • शाश्वत सत्य: ध्यान क्या है का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
  • शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
  • 3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।

विशेष आध्यात्मिक संदेशों के लिए शिव शिष्य हरींद्रानंद फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। अधिक लेखों के लिए शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) पर नियमित पधारें।

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