कठोरता भी दया: 3 मुख्य कारण एवं गुरु अनुकंपा | Shiv Guru Charcha
By / December 19, 2015
आज के समय में कठोरता भी दया के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।
साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।
जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।
गुरु की कठोरता भी दया है!
गुरु आखिर कठोरता करते हैं तो क्यों? किसके हित में?
निश्चय ही शिष्य को दृढ़ बनाना ही गुरु की कठोरता का उद्देश्य होगा।
वास्तव में गुरु का दयाभाव ही गुरुभाव है। जो प्रतीत होता है कि, कठोरता है, वह कठोरता नहीं दया ही है। क्योंकि इस कठोरता का परिणाम अत्यंत सुन्दर होता है। हालाँकि तात्कालिक रूप से यह कष्टकर लग सकता है।
एक बात तो निश्चित है कि, परीक्षा लेने से पूर्व, शिष्य को परीक्षा के योग्य बनाया जाता है, जो बिना गुरुदया के संभव ही नहीं है। कोई भी गुरु शिष्य की उतनी ही परीक्षा लेते हैं, जितनी के लायक शिष्य को समझते हैं। ये अलग बात है कि, शिष्य को अपनी योग्यता का तबतक पता नहीं चलता है, जबतक वह परीक्षा की घड़ियों से सफलता पूर्वक निकल नहीं जाता है।
आखिर पास भी तो गुरु ही करवाते हैं। यह भी तो गुरुदया ही है।
उससे भी पहले अगर शिव-गुरु की बात की जाय तो, शिव का शिष्य बनना ही संभव नहीं है, अगर गुरु दया नहीं करें। परीक्षा तो शिष्य की न होगी!
तो आइये हम शिव-शिष्य बनने का प्रयास करें।
इसके लिये, शिव-गुरु की दया से, मानव-जाति को, शिव-गुरु की दया से 3 सूत्र सहायक हैं।
1. दया मांगना-
“हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये” (मन ही मन)
2. चर्चा करना-
दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, “शिव मेरे गुरु हैं, आपके भी हो सकते हैं”
3. नमन करना-
अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करने की कोशीश करना। चाहें तो नमः शिवाय का प्रयोग कर सकते हैं। (मन ही मन, सांस लेते समय नमः तथा छोड़ते समय शिवाय)
मुख्य बिंदु (Key Takeaways – कठोरता भी दया)
शाश्वत सत्य:कठोरता भी दया का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।