भ्रष्टाचार का निवारण: मन की शुद्धि एवं 3 मुख्य उपाय | Shiv Guru Charcha

आज के समय में भ्रष्टाचार का निवारण के आध्यात्मिक रहस्य को समझना अत्यंत आवश्यक है। शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) के अनुसार जब तक मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानता, तब तक जीवन में स्थायी शांति पाना कठिन है।

भ्रष्टाचार का निवारण

साहेब श्री हरींद्रानंद जी ने विश्व के समक्ष यह शाश्वत विचार प्रस्तुत किया कि भगवान शिव ही हर मानव के प्रथम और अंतिम गुरु हैं। शिव को अपना गुरु बनाने के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है। केवल निश्छल मन और गुरु की दया की चाह ही पर्याप्त है।

जब साधक प्रतिदिन शिव से दया माँगता है, अन्य लोगों से शिव की गुरुता की चर्चा करता है, और नमः शिवाय का जप करता है, तो उसका जीवन बदल जाता है। शिव की दया हर परिस्थिति में शिष्य का संबल बनती है।

भ्रष्टाचार क्या है?
उपयुक्त आचरण से भ्रष्ट हो जाना अर्थात पतित हो जाना अर्थात नीचे गिर जाना भ्रष्टाचार है। जैसे कि, चोरी, बेईमानी, घूसखोरी, भेदभाव, जातिवाद, सम्प्रदायिकता, घृणा, तुच्छ स्वार्थ, इत्यादि।

भ्रष्टाचार क्यों है?
मानवीय चेतना का अधःपतन अर्थात सोच का नीचे गिर जाना ही भ्रष्टाचार का कारण है। इसीलिए आम भाषा में भ्रष्ट आदमी को गिरा हुआ कहा जाता है।

भ्रष्टाचार को कैसे दूर किया जा सकता है?
मानवीय चेतना के पुनरुत्थान के लिए प्रबल गुरूत्व की आवश्यकता है। सूक्ष्मातिसूक्ष्म परम चैतन्यात्मा शिव से अधिक गुरूत्व किसमें हो सकता है? आवश्यकता है तो बस व्यष्टिगत चेतना को परम चेतना से जोड़ने की।

एक ही विकल्प है, “भगवान शिव को ‘अपना’ गुरु बनाया जाय”…

3 सूत्रों की सहायता से:

1. दया मांगना:

हे शिव आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दीजिये (मन ही मन)

2. चर्चा करना:

दूसरों को भी यह सन्देश देना कि, शिव मेरे गुरु हैं, आपके भी हो सकते हैं

3. नमन करना:

अपने गुरु को प्रणाम निवेदित करने की कोशिश करना। चाहें तो नमः शिवाय का प्रयोग कर सकते हैं (मन ही मन: साँस लेते समय नमः, छोड़ते समय शिवाय)

भ्रष्टाचार को कब दूर किया जा सकता है?
अब और अभी। शुभ कार्य में कभी विलम्ब नहीं करना चाहिए। वैसे भी गुरुदया से यह कार्य तीव्र गति से चल रहा है और इसके परिणाम भी दिखने शुरू हो गए हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways – भ्रष्टाचार का निवारण)

  • शाश्वत सत्य: भ्रष्टाचार का निवारण का बोध जीवन में शांति प्रदान करता है।
  • शिव गुरु: शिव को गुरु मानकर दया माँगने से जीवन के कष्ट मिटते हैं।
  • 3 सूत्र: दया माँगना, चर्चा करना और नमः शिवाय जप ही शिव शिष्यता का सहज साधन है।

विशेष आध्यात्मिक संदेशों के लिए शिव शिष्य हरींद्रानंद फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ। अधिक लेखों के लिए शिव गुरु चर्चा (Shiv Guru Charcha) पर नियमित पधारें।

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